ख़ामोश सी ये ज़िंदगी ...... बेपरवा ये अफ़साना ..... अब तो आ जा ना ,मेरी जाना .... तू ही तो हैं इक मेरे जीने का बहाना ..... सीने से सांसो का आना जाना ..... तेरी रूह का मेरी रूह में घुल के सो जाना ...... यादों के ज़ाम को फिर लबों पे सजाना ..... खामोश सा अफ़साना।। अँधेरी रात में तारों का आशियाना..... फिर उस रात में तेरा मुस्कुराना..... बाँहों का हार बनाकर धीमें से तेरा गुनगुनाना ..... सीने से लग मेरे.... मुझको अपनी खुशबू से महकाना .... पागल हुआ खुशबू से तेरा ये दीवाना .... किसी कोने से सूरज की किरणों का....... आँखों में चौंधियाना ..... परदें लगा ..... फिर से सपनों की दुनिया में खो जाना ।। khaamosh see ye zindagee ...... beparava ye afasaana ..... ab to aa ja na ,meree jaana .... too hee to hain ik mere jeene ka bahaana ..... seene ...
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